डॉ. अनिल सिंघवी, MD · 35+ साल का अनुभव · मध्य प्रदेश के पहले हेमेटोलॉजी सेंटर के संस्थापकइंदौर में क्लिनिक आकर या वीडियो कॉल पर सलाह लें।
ओवेरियन कैंसर अंडाशय या फ़ैलोपियन ट्यूब में होता है। शुरुआती लक्षण (पेट फूलना, अपच, पेट में हल्की तकलीफ़) रोज़ की परेशानियों जैसे लगते हैं, इसलिए अक्सर इसका पता देर से चलता है। चेतावनी संकेत है लक्षणों का बने रहना: ऐसे लक्षण जो हफ़्तों तक रहें और धीरे-धीरे बढ़ें।
इलाज में ऑपरेशन और कीमोथेरेपी दोनों होते हैं, और नई मेंटेनेंस दवाइयों से नतीजे बेहतर हुए हैं। बढ़ा हुआ ओवेरियन कैंसर भी आधुनिक इलाज से लंबे समय तक काबू में रखा जा सकता है।
जाँच में अंदरूनी परीक्षण, पेट की सोनोग्राफ़ी या CT स्कैन, और CA-125 खून की जाँच होती है। बीमारी और स्टेज आम तौर पर ऑपरेशन के समय पक्की होती है, जब पैथोलॉजिस्ट ऊतक की जाँच करते हैं। कई मरीज़ों को जेनेटिक टेस्ट (BRCA) की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे इलाज तय करने में मदद मिलती है और परिवार के सदस्यों को भी बचाया जा सकता है।
मुख्य इलाज है ट्यूमर निकालने का ऑपरेशन, साथ में प्लैटिनम वाली कीमोथेरेपी, जो स्टेज के हिसाब से ऑपरेशन से पहले या बाद में दी जाती है। PARP इनहिबिटर जैसी नई मेंटेनेंस दवाइयाँ बीमारी को ज़्यादा समय तक दूर रखती हैं, ख़ासकर BRCA-पॉज़िटिव मरीज़ों में। कीमोथेरेपी आम तौर पर डे-केयर में दी जाती है।
यह जानकारी सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है, यह डॉक्टर से सलाह की जगह नहीं ले सकती। हर मरीज़ अलग होता है, और सही इलाज पूरी जाँच के बाद ही तय किया जा सकता है।
डॉ. अनिल बताते हैं कि नए इलाज से कैंसर अब कैसे ठीक हो सकता है।
कैंसर और खून की बीमारियों के इलाज में 30 साल से ज़्यादा अनुभव वाले विशेषज्ञ से सलाह लें। सेकंड ओपिनियन और ऑनलाइन कंसल्टेशन भी उपलब्ध है।
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